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आगी होती तो का पाहुनो मूंछें लैके चलो जातो.

यदि हम समर्थ होते तो कुछ कर न दिखाते. कोई स्त्री पड़ौस में किसी दूसरी स्त्री के यहाँ आग लेने गयी. संयोग से उस समय उसके यहाँ आग नहीं थी, साथ ही उसके यहाँ कई दिन से एक मेहमान आया था जो बड़ी मुश्किल से अभी अभी घर से गया था. उसकी मेहमानदारी से वह झल्लायी बैठी थी, अतः उसने उत्तर दिया – आग घर में होती तो मैं मेहमान की मूंछें न जला देती.