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सुनार अपनी माँ की नथ में से भी चुराता है

एक बार किसी बादशाह ने सुनार से पूछा कि तुम रुपए में कितना खा सकते हो? सुनार ने जवाब दिया- 'सोलह आने तक।' बादशाह इस बात से चिढ़ गया और कह...

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सींख सड़प्पे तो लाला जी के साथ गए, अब तो देखो और खाओ

किसी कंजूस ने अपने घर में यह नियम बना रखा था कि घी के बर्तन में सींक डुबाने से जितना घी निकले, उतना ही हर आदमी ले लिया करे। जब वह मर गय...

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सहरी खाये सो रोजा रक्खे

रोज़े के दिनों में मुसलमान सूर्योदय के पहले ही खूब जम कर खाना खा लेते हैं। फिर दिन भर कुछ नहीं खाते पीते। शाम को इफ्तार होने पर ही कुछ ...

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मन चंगा तो कठौती में गंगा

मन चंगा तो कठौती में गंगा (अगर मन शुद्ध है तो सारे सारे तीर्थ घर में ही हैं)। एक बार संत रैदास ने कुछ यात्रियों को गंगास्नान के लिए ...

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पार उतरूं तो बकरा दूं

पार उतरूं तो बकरा दूं  (जब कोई मुसीबत के समय तो देवी देवता से मन्नत मांगे, पर छुटकारा पाने पर मुकरजाए।) कोई मियाँ नाव में बैठकर नदी ...

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देख तिरिया के चाले, सिर मुंडा मुंह काले, देख मर्दों की फेरी, मां तेरी कि मेरी

कोई चालाक औरत बीमारी का बहाना करके लेट गई और अपने पति से बोली कि जब तक तुम अपनी माँ को सिर मुड़ाकर गधे पर सवार कराके नहीं लाओगे तब तक म...

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तीन में न तेरह में

तीन में न तेरह में (ऐसा व्यक्ति जो किसी गिनती में न हो). इसकी पूरी कहावत इस प्रकार है. तीन में न तेरह में, न सेर भर सुतली में, न करवा भ...

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जग जीता मोरी कानी, वर ठाढ़ होय तब जानी

कुछ लोगों ने धोखा देकर एक कानी लड़की का ब्याह एक लड़के के साथ तय कर दिया। वर पक्ष के लोगों को जब इसका पता चला, तो वे एक लंगड़े को दूल्ह...

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