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एक ही साड़ी में नौ रे नौ, कहे सुने न मनियो रीस, तोहे लगा के पूरे बीस

एक व्यक्ति के पास कोई एक बहुत कीमती साड़ी थी. उसे दिखा कर वह किसी स्त्री को फंसाता, फिर उससे शादी कर के कुछ दिन बाद उसे छोड़ कर फिर नया श...

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नदी किनारे दी है साखी, सोलह में तीन दिए तेरह बाकी

किसी अनपढ़ भोले भाले मल्लाह ने अपना टैक्स दे दिया था पर पटवारी ने उससे पैसे वसूलने के चक्कर में जान बूझ कर रसीद नहीं दी थी. एक बार पटवार...

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न चलनी में पानी आएगा, न चोकर की रस्सी बनेगी

भोजपुरी की प्रसिद्द लोकगाथा लोरिकायन के नायक लोरिक की बरात में कन्या के पिता ने बारातियों की परीक्षा लेने के लिए एक के बाद कई शर्तें रख...

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बीरबल लाओ ऐसा नर, पीर बाबर्ची भिश्ती खर

एक बार अकबर ने बीरबल से ऐसा कोई आदमी लाने को कहा जो सारे काम कर सकता हो – पीर भी बन जाए अर्थात धर्म का ज्ञान भी दे सके, बाबर्ची का काम ...

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अतिसय लोभ बकुल ने कीन्हा, छन में प्राण केकड़ा लीन्हा

बकुल – बगुला. एक बूढा बगुला मछली पकड़ने में असमर्थ हो गया तो उसने एक योजना बनाई. वह तालाब के किनारे बैठ कर आंसू बहाने लगा. अन्य जीवों ने...

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दस पाँच लड़के एक संतोस, गदहा मारे कबहूँ न दोस

दस-पाँच लड़कों के साथ संतोष भी है, तो गदहा मारने में कोई दोष नहीं. एक बार कुछ लड़कों ने मिल कर एक गदहे को मार डाला. जब यह बात गाँव में ...

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लाला जी तोर बतिया कहि देब

कोई लालाजी बेर के पेड़ के नीचे बैठ कर शौच कर रहे थे. तभी पेड़ से एक पका हुआ बेर टूट कर उनके सामने गिरा. लाला जी से नहीं रहा गया. उनहोंने ...

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