20 Jun Uncategorized आखिर ऐसे कब तक, जब तक चले तब तक June 20, 2024 By admin किसी ने पूछा - यह अनीतिपूर्ण व्यवहार कब तक चलेगा. उत्तर मिला- जब तक चल सके ऐसे ही चलाओ. कहीं चार ब्राह्मण भाई रहते थे. चारों भाई मूर्ख ... Continue reading
20 Jun Uncategorized जो तुम्हें कह गया, वह मुझे भी कह गया June 20, 2024 By admin एक राह चलती बुढ़िया ने किसी घुड़सवार से अपनी पोटली ले चलने के लिए कहा. घुड़सवार ने यह कहकर इनकार कर दिया कि घोड़े के सवार और बुढ़िया माई... Continue reading
20 Jun Uncategorized ना बात बिरानी कैये, ना ऐंचा तानी सैये June 20, 2024 By admin न व्यर्थ दूसरे की बात किसी से कहो और न इँचे-खिंचे फिरो. एक बार किसी सियार की स्त्री ने एक शेर की माँद में जाकर बच्चे दिये. उस समय शेर ब... Continue reading
20 Jun Uncategorized सांची कहें तो मौसी का काजल June 20, 2024 By admin सच बात कहने से कोई तिनक उठे तब. एक सज्जन बड़े मुँहफट और स्पष्टवादी थे. इस कारण उनका नाम 'साँचेरैया' पड़ गया था. एक बार वह अपनी मौसी के यह... Continue reading
20 Jun Uncategorized बिलइया अपनो एक दाँव तो छिपा राखत June 20, 2024 By admin होशियार आदमी अपना सब हुनर दूसरों को नहीं बताता. एक बार एक शेर ने बिल्ली के पास जाकर कहा कि मौसी तुम्हें तो शिकार के बहुत से दाव पेंच आत... Continue reading
20 Jun Uncategorized नित चंदन, नित पानी, सालिगराम धुल गये तब जानी June 20, 2024 By admin एक सेठ जी शालिग्राम के बड़े भक्त थे और दिन भर उनकी पूजा किया करते थे. उनकी स्त्री इस बात से काफी तंग थी. एक दिन उसने ने उनके इस अभ्यास ... Continue reading
20 Jun Uncategorized नौ सौ चूहे खाय बिलाई बैठी तप पे June 20, 2024 By admin एक बार एक बिल्ली बूढ़ी हो जाने पर गंगा जी के तट पर सर के बल खड़ी हो कर तपस्या करने का ढोंग करने लगी और कहने लगी कि मैं ने जीवन भर बहुत पा... Continue reading
20 Jun Uncategorized जो नंगी नाचै, सोई पूतै खाय June 20, 2024 By admin किसी मनुष्य के दो स्त्रियां थीं. बड़ी की गोद में छ: महीने का बालक था. जिसे देख कर छोटी बहुत कुढ़ती थी. एक दिन मौका पाकर छोटी ने उस बच्चे ... Continue reading
20 Jun Uncategorized तीन में न तेरा में मृदंग बजावें डेरा में June 20, 2024 By admin ऐसा व्यक्ति जो किसी गिनती में न हो. कहावत का प्रयोग ऐसे अवसर पर होता है जब किसी आदमी की कोई कदर न हो, परन्तु फिर भी बिना पूछे वह बीच मे... Continue reading
20 Jun Uncategorized जैसे को तैसा मिला, मिली खीर में खाँड़, तू जात की बेड़नी, मैं जात का भाँड़ June 20, 2024 By admin एक ग्रामीण वैश्या ने पितृ पक्ष के दिनों में ब्राह्मणों को अपने घर भोजन कराना चाहा. परन्तु कोई उसके घर आने को राजी नहीं हुआ. बहुत ढूँढ़ ... Continue reading